Shiv Tandav Stotram Lyrics hindi | शिव तांडव स्तोत्र अर्थ सहित

Shiv Tandav Stotram Lyrics hindi शिव तांडव स्तोत्र अर्थ सहित

दोस्तों इस पोस्ट में हम ये जानेंगे की Shiv Tandav Stotram (शिव तांडव स्तोत्र) की रचना किसने की हे ? शिव तांडव स्तोत्र का हिंदी में अर्थ क्या हे ? साथ ही इस शिव तांडव स्तोत्र के महत्व के बारेमे जानना चाहते हे तो हमारे साथ बने रहिये ।

शिव तांडव स्त्रोतम रावण द्वारा रचित है इसलिए इसे रावण तांडव स्त्रोतम के नाम से भी जाना जाता है। यह स्त्रोत भगवान शिव को समर्पित हैं और भगवान शिव की सुंदरता और शक्तियों के बारे में हैं । संस्कृत में इसके 1008 श्लोक हैं । भक्ति की यह कविता स्पष्ट रूप से लिखी गई है

Shiv Tandav Stotram Song Detail :

Album :Shiv Tandav Stotram
Author :Ravan
Singer :Shankar Mahadevan
Composer :Shilesh Dani
Language :Sanskrit
Genre : Stotram
Label :Times Music Spiritual
Lyrics :Traditional

The Shiva Tandava Stotram was written by the king of Lanka Ravana, the asura King and devotee of Shiva. This hymn was created in the Sanskrit language. Chanting the Shiv Tandav Stotram to purify the mind and body, remove negative energy, and increase inner strength and confidence.

शिव तांडव स्तोत्र अर्थ सहित | Shiv Tandav Stotram Lyrics with Meaning

जटा टवी गलज्जलप्रवाह पावितस्थले गलेऽव लम्ब्यलम्बितां भुजंगतुंग मालिकाम्‌।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनाद वड्डमर्वयं चकारचण्डताण्डवं तनोतु नः शिव: शिवम्‌ ॥1॥

हिंदी में अर्थ : उनके बालों से बहने वाले जल से उनका कंठ पवित्र है, और उनके गले में सांप है जो हार की तरह लटका है,
और डमरू से डमट् डमट् डमट् की ध्वनि निकल रही है, भगवान शिव शुभ तांडव नृत्य कर रहे हैं, वे हम सबको संपन्नता प्रदान करें।

जटाकटा हसंभ्रम भ्रमन्निलिंपनिर्झरी विलोलवीचिवल्लरी विराजमानमूर्धनि।
धगद्धगद्धगज्ज्वल ल्ललाटपट्टपावके किशोरचंद्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम: ॥2॥

हिंदी में अर्थ : मेरी शिव में गहरी रुचि है, जिनका सिर अलौकिक गंगा नदी की बहती लहरों की धाराओं से सुशोभित है, जो उनकी बालों की उलझी जटाओं की गहराई में उमड़ रही हैं ? जिनके मस्तक की सतह पर चमकदार अग्नि प्रज्वलित है, और जो अपने सिर पर अर्ध-चंद्र का आभूषण पहने हैं ।

धराधरेंद्रनंदिनी विलासबन्धुबन्धुर स्फुरद्दिगंतसंतति प्रमोद मानमानसे।
कृपाकटाक्षधोरणी निरुद्धदुर्धरापदि क्वचिद्विगम्बरे मनोविनोदमेतु वस्तुनि ॥3॥

हिंदी में अर्थ : मेरा मन भगवान शिव में अपनी खुशी खोजे, अद्भुत ब्रह्माण्ड के सारे प्राणी जिनके मन में मौजूद हैं,
जिनकी अर्धांगिनी पर्वतराज की पुत्री पार्वती हैं, जो अपनी करुणा दृष्टि से असाधारण आपदा को नियंत्रित करते हैं, जो सर्वत्र व्याप्त है,
और जो दिव्य लोकों को अपनी पोशाक की तरह धारण करते हैं।

जटाभुजंगपिंगल स्फुरत्फणामणिप्रभा कदंबकुंकुमद्रव प्रलिप्तदिग्व धूमुखे।
मदांधसिंधु रस्फुरत्वगुत्तरीयमेदुरे मनोविनोदद्भुतं बिंभर्तुभूत भर्तरि ॥4॥

हिंदी में अर्थ : मुझे भगवान शिव में अनोखा सुख मिले, जो सारे जीवन के रक्षक हैं, उनके रेंगते हुए सांप का फन लाल-भूरा है और मणि चमक रही है,
ये दिशाओं की देवियों के सुंदर चेहरों पर विभिन्न रंग बिखेर रहा है, जो विशाल मदमस्त हाथी की खाल से बने जगमगाते दुशाले से ढंका है।

सहस्रलोचन प्रभृत्यशेषलेखशेखर प्रसूनधूलिधोरणी विधूसरां घ्रिपीठभूः।
भुजंगराजमालया निबद्धजाटजूटकः श्रियैचिरायजायतां चकोरबंधुशेखरः ॥5॥

हिंदी में अर्थ : जिन शिव जी के चरण इन्द्र-विष्णु आदि देवताओं के मस्तक के पुष्पों की धूल से रंजित हैं (जिन्हें देवतागण अपने सर के पुष्प अर्पण करते हैं), जिनकी जटाओं में लाल सर्प विराजमान है, वो चन्द्रशेखर हमें चिरकाल के लिए सम्पदा दें।

ललाटचत्वरज्वल द्धनंजयस्फुलिंगभा निपीतपंच सायकंनम न्निलिंपनायकम्‌।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं महाकपालिसंपदे शिरोजटालमस्तुनः ॥6॥

हिंदी में अर्थ : शिव के बालों की उलझी जटाओं से हम सिद्धि की दौलत प्राप्त करें, जिन्होंने कामदेव को अपने मस्तक पर जलने वाली अग्नि की चिनगारी से नष्ट किया था,जो सारे देवलोकों के स्वामियों द्वारा आदरणीय हैं, जो अर्ध-चंद्र से सुशोभित हैं।

करालभालपट्टिका धगद्धगद्धगज्ज्वल द्धनंजया धरीकृतप्रचंड पंचसायके।
धराधरेंद्रनंदिनी कुचाग्रचित्रपत्र कप्रकल्पनैकशिल्पिनी त्रिलोचनेरतिर्मम ॥7॥

हिंदी में अर्थ : जिनके मस्तक से धक-धक करती प्रचण्ड ज्वाला ने कामदेव को भस्म कर दिया तथा जो शिव पार्वती जी के स्तन के अग्र भाग पर चित्रकारी करने में अति चतुर हैं (यहाँ पार्वती प्रकृति हैं, तथा चित्रकारी सृजन है), उन शिव जी में मेरी प्रीति अटल हो।

नवीनमेघमंडली निरुद्धदुर्धरस्फुर त्कुहुनिशीथनीतमः प्रबद्धबद्धकन्धरः।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिंधुरः कलानिधानबंधुरः श्रियं जगंद्धुरंधरः ॥8॥

हिंदी में अर्थ : भगवान शिव हमें संपन्नता दें,वे ही पूरे संसार का भार उठाते हैं,जिनकी शोभा चंद्रमा है,
जिनके पास अलौकिक गंगा नदी है,जिनकी गर्दन गला बादलों की पर्तों से ढंकी अमावस्या की अर्धरात्रि की तरह काली है।

प्रफुल्लनीलपंकज प्रपंचकालिमप्रभा विडंबि कंठकंध रारुचि प्रबंधकंधरम्‌।
स्मरच्छिदं पुरच्छिंद भवच्छिदं मखच्छिदं गजच्छिदांधकच्छिदं तमंतकच्छिदं भजे ॥9॥

हिंदी में अर्थ : मैं भगवान शिव की प्रार्थना करता हूं, जिनका कंठ मंदिरों की चमक से बंधा है, पूरे खिले नीले कमल के फूलों की गरिमा से लटकता हुआ,
जो ब्रह्माण्ड की कालिमा सा दिखता है। जो कामदेव को मारने वाले हैं, जिन्होंने त्रिपुर का अंत किया, जिन्होंने सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया, जिन्होंने बलि का अंत किया, जिन्होंने अंधक दैत्य का विनाश किया, जो हाथियों को मारने वाले हैं, और जिन्होंने मृत्यु के देवता यम को पराजित किया।

अखर्वसर्वमंगला कलाकदम्बमंजरी रसप्रवाह माधुरी विजृंभणा मधुव्रतम्‌।
स्मरांतकं पुरातकं भावंतकं मखांतकं गजांतकांधकांतकं तमंतकांतकं भजे ॥10॥

हिंदी में अर्थ : मैं भगवान शिव की प्रार्थना करता हूं, जिनके चारों ओर मधुमक्खियां उड़ती रहती हैं शुभ कदंब के फूलों के सुंदर गुच्छे से आने वाली शहद की मधुर सुगंध के कारण, जो कामदेव को मारने वाले हैं, जिन्होंने त्रिपुर का अंत किया, जिन्होंने सांसारिक जीवन के बंधनों को नष्ट किया, जिन्होंने बलि का अंत किया,
जिन्होंने अंधक दैत्य का विनाश किया, जो हाथियों को मारने वाले हैं, और जिन्होंने मृत्यु के देवता यम को पराजित किया।

जयत्वदभ्रविभ्रम भ्रमद्भुजंगमस्फुरद्ध गद्धगद्विनिर्गमत्कराल भाल हव्यवाट्।
धिमिद्धिमिद्धि मिध्वनन्मृदंग तुंगमंगलध्वनिक्रमप्रवर्तित: प्रचण्ड ताण्डवः शिवः ॥11॥

हिंदी में अर्थ : शिव, जिनका तांडव नृत्य नगाड़े की ढिमिड ढिमिड तेज आवाज श्रंखला के साथ लय में है, जिनके महान मस्तक पर अग्नि है, वो अग्नि फैल रही है नाग की सांस के कारण, गरिमामय आकाश में गोल-गोल घूमती हुई ।

दृषद्विचित्रतल्पयो र्भुजंगमौक्तिकमस्र जोर्गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः।
तृणारविंदचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः समं प्रवर्तयन्मनः कदा सदाशिवं भजे ॥12॥

हिंदी में अर्थ : मैं भगवान सदाशिव की पूजा कब कर सकूंगा, शाश्वत शुभ देवता, जो रखते हैं सम्राटों और लोगों के प्रति समभाव दृष्टि, घास के तिनके और कमल के प्रति, मित्रों और शत्रुओं के प्रति,सर्वाधिक मूल्यवान रत्न और धूल के ढेर के प्रति, सांप और हार के प्रति और विश्व में विभिन्न रूपों के प्रति ?

कदा निलिंपनिर्झरी निकुंजकोटरे वसन्‌ विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरःस्थमंजलिं वहन्‌।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः शिवेति मंत्रमुच्चरन्‌ कदा सुखी भवाम्यहम्‌ ॥13॥

हिंदी में अर्थ : मैं कब प्रसन्न हो सकता हूं, अलौकिक नदी गंगा के निकट गुफा में रहते हुए, अपने हाथों को हर समय बांधकर अपने सिर पर रखे हुए,
अपने दूषित विचारों को धोकर दूर करके, शिव मंत्र को बोलते हुए, महान मस्तक और जीवंत नेत्रों वाले भगवान को समर्पित?

इमं हि नित्यमेव मुक्तमुक्तमोत्तम स्तवं पठन्स्मरन्‌ ब्रुवन्नरो विशुद्धमेति संततम्‌।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथागतिं विमोहनं हि देहिनां सुशंकरस्य चिंतनम् ॥14॥

हिंदी में अर्थ : इस स्तोत्र को, जो भी पढ़ता है, याद करता है और सुनाता है, वह सदैव के लिए पवित्र हो जाता है और महान गुरु शिव की भक्ति पाता है । इस भक्ति के लिए कोई दूसरा मार्ग या उपाय नहीं है । बस शिव का विचार ही भ्रम को दूर कर देता है ।

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरंगयुक्तां लक्ष्मीं सदैव सुमुखीं प्रददाति शम्भुः ॥15 ॥

हिंदी में अर्थ : प्रात: शिवपूजन के अंत में इस रावणकृत शिवताण्डवस्तोत्र के गान से लक्ष्मी स्थिर रहती हैं तथा भक्त रथ, गज, घोड़े आदि सम्पदा से सर्वदा युक्त रहता है।

Shiv Tandav Stotram Lyrics Meaning – शिव तांडव स्तोत्र

Jatatavigalajjala pravahapavitasthale
Galeavalambya lambitam bhujangatungamalikam |
Damad damad damaddama ninadavadamarvayam
Chakara chandtandavam tanotu nah shivah shivam ||1||

Meaning in English : From the forest of his matted lock, water flows and wets his neck, On which hangs the greatest of snake-like a garland, And his drum incessantly plays damat, damat, damat, damat, And Shiva is engaged in the very vigorous manly dance, To bless and shower, prosperity on all of us.

Jata kata hasambhrama bhramanilimpanirjhari
Vilolavichivalarai virajamanamurdhani |
Dhagadhagadhagajjva lalalata pattapavake
Kishora chandrashekhare ratih pratikshanam mama ||2||

Meaning in English : The celestial river agitatedly moving through his matted hair, Which makes his head shine with those soft waves, And his forehead shining like a brilliant fire-daga daga, And the crescent of moon which is an ornament to his head, Makes my mind love him each and every second.

Dharadharendrana ndinivilasabandhubandhura
Sphuradigantasantati pramodamanamanase |
Krupakatakshadhorani nirudhadurdharapadi
Kvachidigambare manovinodametuvastuni ||3||

Meaning in English : The consort of the ever sportive daughter of the mountain, Whose mind rejoices at her side long glances, With the stream of merciful look which removes hardships, Makes my mind take pleasure in him who wears the directions as apparel.

Jata bhujan gapingala sphuratphanamaniprabha
Kadambakunkuma dravapralipta digvadhumukhe |
Madandha sindhu rasphuratvagutariyamedure
Mano vinodamadbhutam bibhartu bhutabhartari ||4||

Meaning in English : He, with the shining lustrous gem on the hood Of the serpent entwining his matted locks, He, who is with his bride whose face is decorated By the melting of red saffron Kumkum, And He who wears on his shoulder the hide Of the elephant which was blind with ferociousness, Makes my mind happy and contented, In him who is the leader of Bhoothas.

Sahasra lochana prabhritya sheshalekhashekhara
Prasuna dhulidhorani vidhusaranghripithabhuh |
Bhujangaraja malaya nibaddhajatajutaka
Shriyai chiraya jayatam chakora bandhushekharah ||5||

Meaning in English : May he whose foot stool is decorated By the ever flowing flower dust. Falling the bent head of Indra and other Gods, And may He, whose matted locks are tied by the king of serpents, And may he, whose head is decorated By the crescent moon who a friend of Chakora. Shower prosperity for ever on me.

Lalata chatvarajvaladhanajnjayasphulingabha
Nipitapajnchasayakam namannilimpanayakam |
Sudha mayukha lekhaya virajamanashekharam
Maha kapali sampade shirojatalamastu nah ||6||

Meaning in English : May he with the raging fire, In his forehead, who burnt the God of love, May He who is forever being saluted by king of devas, And may he who has collected, The cool ambrosia like crescent moon on his head, And may he who wears the collection of skulls, Bless us to create wealth for us.

Karala bhala pattikadhagaddhagaddhagajjvala
Ddhanajnjaya hutikruta prachandapajnchasayake |
Dharadharendra nandini kuchagrachitrapatraka
Prakalpanaikashilpini trilochane ratirmama ||7||

Meaning in English : May He in whose dreadful forehead, fire burns “Dhahaga”, “Dhaga,” May He who burnt the one with five arrows as an offering to fire, May He who is the only one who can write decorative lines, On the tip of the breasts of the daughter of the mountain, And May He with three eyes makes mind enjoy in him.

Navina megha mandali niruddhadurdharasphurat
Kuhu nishithinitamah prabandhabaddhakandharah |
Nilimpanirjhari dharastanotu krutti sindhurah
Kalanidhanabandhurah shriyam jagaddhurandharah ||8||

Meaning in English : May He whose black neck is as dark, As several layers of new clouds, Packed closely on the night of the new moon. May He who wears the celestial river on his head, May He who killed the Gajasura with an elephant head, May He who is very handsome because of the crescent that he wears, And may he who carries the entire burden of the world, Bless us with all sorts of wealth.

Praphulla nila pankaja prapajnchakalimchatha
Vdambi kanthakandali raruchi prabaddhakandharam |
Smarachchidam purachchhidam bhavachchidam makhachchidam
Gajachchidandhakachidam tamamtakachchidam bhaje ||9||

Meaning in English : I salute him, who shines with a black neck, Similar to the well opened blue lotus, On which all the temples depend for prayer, And him who destroyed God of love, the three cities, The worldly problems and yaga destroyers, And him who destroyed elephant faced Asura and also God of death.

Akharvagarvasarvamangala kalakadambamajnjari
Rasapravaha madhuri vijrumbhana madhuvratam |
Smarantakam purantakam bhavantakam makhantakam
Gajantakandhakantakam tamantakantakam bhaje ||10||

Meaning in English : I salute him who is like the bee who drinks the sweetened honey, That flows from the flower bunch of collection of arts of the Goddess, And him who destroyed God of love, the three cities, The worldly problems and yaga destroyers, And him who destroyed elephant faced Asura and also God of death.

Jayatvadabhravibhrama bhramadbhujangamasafur
Dhigdhigdhi nirgamatkarala bhaal havyavat |
Dhimiddhimiddhimidhva nanmrudangatungamangala
Dhvanikramapravartita prachanda tandavah shivah ||11||

Meaning in English : Victory to the great Shiva, who has the fire burning in his forehead, Which is increased by the breath of the snake wandering in the sky, And to Him who dances to the changing tunes and fierce sound, Of Dhimi, dhimi, dhimi coming out the auspicious drum.

Drushadvichitratalpayor bhujanga mauktikasrajor
Garishtharatnaloshthayoh suhrudvipakshapakshayoh |
Trushnaravindachakshushoh prajamahimahendrayoh
Sama pravartayanmanah kada sadashivam bhajamyaham ||12||

Meaning in English : When will I be able to worship that eternal shiva, With a feeling of equanimity towards snake and a garland, Towards great gems and dirt or friends and enemies, Or Towards a blade of grass and lotus like eyes, Or emperor and ordinary men.

Kada nilimpanirjhari nikujnjakotare vasanh
Vimuktadurmatih sada shirah sthamajnjalim vahanh |
Vimuktalolalochano lalamabhalalagnakah
Shiveti mantramuchcharan sada sukhi bhavamyaham ||13||

Meaning in English : When will I live the life of pleasure, meditating on Shiva, Sitting near a hollow place near the celestial river Ganga, Releasing all my bad thoughts and with hands clasped above my head, After releasing all passion for the pretty women with shifting eyes?

Imam hi nityameva muktamuttamottamam stavam
Pathansmaran bruvannaro vishuddhimeti santatam |
Hare gurau subhaktimashu yati nanyatha gatim
Vimohanam hi dehinam sushankarasya chintanam ||14||

Meaning in English : This greater than the great prayer if read, Remembered, or recited daily by man, Will make him pure, eternal, And he would get devotion to Shiva leading him to salvation, For remembering Lord Shiva, is a sure method of removal of detachment.

Puja vasanasamaye dashavaktragitam
Yah shambhupujanaparam pathati pradoshhe |
Tasya sthiram rathagajendraturangayuktam
Lakshmim sadaiva sumukhim pradadati shambhuh ||15||

Meaning in English : He who sings this song composed by the ten-headed one, At the end of every worship or, Reads it after worship of Shiva on the Pradosha day, Will get the blessing of Lord Shiva, chariots, elephants and horses, As well as the affectionate sight of the god of wealth.

Ithi Sri Shiva Tandava Stotram Sampurnam

Shiv Tandav Stotram Lyrics Gujarati – શિવ તાંડવ સ્તોત્ર

ભગવાન શિવ ને પ્રસન્ન કરવા માટે તેમના એક મહાન ભક્ત “રાવણ” દ્વારા શિવ તાંડવ ની રચના કરવામાં આવી હતી. આ રાવણ દ્વારા રચવામાં આવેલ ખુબજ પ્રભાવશાળી અને શક્તિશાળી સ્તોત્ર માનવામાં આવે છે.

જટા ટવી ગલજ્વલ પ્રવાહપા વિતસ્થલે
ગલેવ લંબ્ય લંબિતાં ભુજંગ તુંગ માલિકામ્ ।
ડમ ડ્ડમ ડ્ડમ ડ્ડમન્નિનાદ વડ્ડ મર્વયં
ચકાર ચંડ તાંડવં તનોતુ નઃ શિવઃ શિવમ્ ॥ 1 ॥

જટા કટાહ સંભ્રમ ભ્રમન્નિ લિંપનિર્ઝરી-
-વિલો લવી ચિવલ્લરી વિરાજ માનમૂર્ધનિ ।
ધગ દ્ધગ દ્ધગ જ્જ્વલ લ્લલાટ પટ્ટપાવકે
કિશોર ચંદ્રશેખરે રતિઃ પ્રતિક્ષણં મમ ॥ 2 ॥

ધરા ધરેંદ્રનંદિની વિલાસ બંધુ બંધુર
સ્ફુર દ્દિગંત સંતતિ પ્રમોદ માન માનસે ।
કૃપા કટાક્ષ ધોરણી નિરુદ્ધ દુર્ધરાપદિ
ક્વચિ દ્દિગંબરે મનો વિનોદ મેતુ વસ્તુનિ ॥ 3 ॥

જટા ભુજંગ પિંગળ સ્ફુરત્ફણા મણિપ્રભા
કદંબ કુંકુમદ્રવ પ્રલિપ્ત દિગ્વધૂમુખે ।
મદાંધ સિંધુરસ્ફુર ત્ત્વગુત્તરીય મેદુરે
મનો વિનોદમદ્ભુતં બિભર્તુ ભૂતભર્તરિ ॥ 4 ॥

સહસ્ર લોચન પ્રભૃત્ય શેષ લેખ શેખર
પ્રસૂન ધૂળિ ધોરણી વિધૂ સરાંઘ્રિ પીઠભૂઃ ।
ભુજંગ રાજ માલયા નિબદ્ધ જાટજૂટક
શ્રિયૈ ચિરાય જાયતાં ચકોરબંધુશેખરઃ ॥ 5 ॥

લલાટ ચત્વર જ્વલ દ્ધનંજય સ્ફુલિંગભા-
-નિપીત પંચસાયકં નમન્નિ લિંપનાયકમ્ ।
સુધા મયૂખ લેખયા વિરાજ માનશેખરં
મહાકપાલિ સંપદે શિરોજટાલ મસ્તુ નઃ ॥ 6 ॥

કરાલ ભાલપટ્ટિકા ધગ દ્ધગ દ્ધગજ્જ્વલ-
દ્ધનંજયાધરીકૃત પ્રચંડ પંચસાયકે ।
ધરા ધરેંદ્ર નંદિની કુચાગ્ર ચિત્રપત્રક-
-પ્રકલ્પનૈક શિલ્પિનિ ત્રિલોચને મતિર્મમ ॥ 7 ॥

નવીન મેઘમંડલી નિરુદ્ધ દુર્ધર સ્ફુરત્-
કુહૂ નિશીથિનીતમઃ પ્રબંધ બંધુકંધરઃ ।
નિલિંપ નિર્ઝરી ધરસ્તનોતુ કૃત્તિસિંધુરઃ
કલા નિધાનબંધુરઃ શ્રિયં જગ ધૂરંધરઃ ॥ 8 ॥

પ્રફુલ્લ નીલ પંકજ પ્રપંચ કાલિમ પ્રભા-
-વિલંબિ કંઠકંદલી રુચિપ્રબદ્ધ કંધરમ્ ।
સ્મરચ્છિદં પુરચ્છિદં ભવચ્છિદં મખચ્છિદં
ગજચ્છિ દાંધકચ્છિદં તમંત કચ્છિદં ભજે ॥ 9 ॥

અખર્વ સર્વમંગળા કલા કદંબમંજરી
રસપ્રવાહમાધુરી વિજૃંભણા મધુવ્રતમ્ ।
સ્મરાંતકં પુરાંતકં ભવાંતકં મખાંતકં
ગજાંત કાંધ કાંતકં તમંત કાંતકં ભજે ॥ 10 ॥

જયત્વદ ભ્રવિભ્રમ ભ્રમદ્ભુજંગ મશ્વસ-
-દ્વિનિર્ગમત્ક્રમસ્ફુર ત્કરાલભાલહવ્યવાટ્ ।
ધિમિ દ્ધિમિ દ્ધિમિ ધ્વનન્મૃદંગતુંગ મંગળ
ધ્વનિ ક્રમપ્રવર્તિત પ્રચંડતાંડવઃ શિવઃ ॥ 11 ॥

દૃષદ્વિ ચિત્રતલ્પયો ર્ભુજંગ મૌક્તિકસ્રજોર્-
-ગરિષ્ઠ રત્ન લોષ્ઠયોઃ સુહૃદ્વિપક્ષ પક્ષયોઃ ।
તૃષ્ણાર વિંદચક્ષુષોઃ પ્રજામહી મહેંદ્રયોઃ
સમં પ્રવર્તયન્મનઃ કદા સદાશિવં ભજે ॥ 12 ॥

કદા નિલિંપ નિર્ઝરી નિકુંજકોટરે વસન્
વિમુક્ત દુર્મતિઃ સદા શિરઃસ્થમંજલિં વહન્ ।
વિમુક્તલોલલોચનો લલાટ ભાલલગ્નકઃ
શિવેતિ મંત્રમુચ્ચરન્ સદા સુખી ભવામ્યહમ્ ॥ 13 ॥

ઇમં હિ નિત્યમેવ મુક્ત મુક્ત મોત્તમંસ્તવં
પઠન્સ્મરં બ્રુવન્નરો વિશુદ્ધિ મેતિસંતતમ્ ।
હરે ગુરૌ સુભક્તિમાશુ યાતિ નાન્યથા ગતિં
વિમોહનં હિ દેહિનાં સુશંકરસ્ય ચિંતનમ્ ॥ 14 ॥

પૂજાવસાનસમયે દશવક્ત્રગીતં યઃ
શંભુપૂજન પરં પઠતિ પ્રદોષે ।
તસ્ય સ્થિરાં રથગજેંદ્ર તુરંગયુક્તાં
લક્ષ્મીં સદૈવ સુમુખિં પ્રદદાતિ શંભુઃ ॥ 15 ॥

શિવ તાંડવ સ્તોત્ર ( Shiv Tandav Stotram) સંપુર્ણમ

शिव तांडव स्तोत्र के फायदे – Benefits of Shiv Tandav Stotram

Shiv Tandav Stotram भगवान शिव को समर्पित एक शक्तिशाली स्तोत्र है। माना जाता है कि शिव तांडव स्तोत्र का जाप, पठन या सुनने से कई फायदे होते हैं।

  • शिव तांडव स्तोत्र का जाप नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है और आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास को बढ़ाता है।
  • इस स्तोत्र का भाव पूर्ण जाप मन पर शांत प्रभाव डालता है और भक्त को ध्यान की स्थिति में प्रवेश करने में मदद करता है।
  • शिव तांडव स्तोत्र का जाप भक्त को तनाव, चिंता और दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकता है।
  • Shiv Tandav Stotram एक बहुत शक्तिशाली मंत्र है जो एकाग्रता और फोकस बढ़ाने में मदद कर सकता है।
  • कहा जाता है कि शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने वाले को भगवान् शिव महान शक्ति प्रदान करते है।
  • ऐसा माना जाता है कि शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में चुनौतियों और बाधाओं पर काबू पाने में मदद मिलती हे
  • Shiv Tandav Stotram स्तोत्र का नियमित जप करने से निर्भयता, साहस और आंतरिक शक्ति की भावना पैदा हो सकती है।

शिव तांडव स्तोत्र का महत्व – Importance Of Shiv Tandav

Shiv Tandav Stotram का अत्यधिक महत्व है और कई कारणों से भगवान शिव के भक्तों द्वारा इसका व्यापक रूप से पाठ किया जाता है:

  • स्तोत्र भक्तों के लिए भगवान शिव के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने का एक साधन है।
  • इस स्तोत्र में भगवान शिव के दिव्य गुणों और रूपों का वर्णन किया गया है
  • शिव तांडव स्तोत्र का पाठ या जाप करने से भक्त के मन को शांति मिलती हे और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में मदद मिलती हे
  • Shiv Tandav Stotram जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म के चक्र का प्रतीक है।
  • शिव तांडव स्तोत्र का भाव और भक्ति से पाठ करने से व्यक्ति भगवान शिव का आशीर्वाद और सुरक्षा पा सकता है।
  • ऐसा माना जाता है कि यह स्तोत्र आध्यात्मिक विकास, शक्ति, साहस और जीवन में बाधाओं और चुनौतियों को दूर करने की क्षमता प्रदान करता है।

Shiv Tandav Stotram का पाठ ईमानदारी, श्रद्धा और इसके महत्व को समझकर करना महत्वपूर्ण है। मंत्र का जाप श्रद्धा और एकाग्रता से करें। मंत्र जाप में आप जितनी अधिक निष्ठा और एकाग्रता लगाएंगे, आपको उतना ही अधिक लाभ प्राप्त होगा।

शिव तांडव स्तोत्र का पाठ कब करना चाहिए?

इस शिव तांडव स्तोत्र का पाठ किसी भी समय किया जा सकता है। हालांकि, शिव तांडव स्तोत्र को सामान्यः सूर्यास्त से पहले और बाद के समय में पढ़ने की सिफारिश की जाती है, क्योंकि ये समय मान्यताओं में शिव पूजा और साधना के लिए विशेष माना जाता है।

  1. सुबह: कई भक्त सुबह शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना पसंद करते हैं, ब्रह्म मुहूर्त के दौरान (जो सूर्योदय से पहले) सबसे अच्छा समय माना जाता हे। इस स्तोत्र के पाठ से दिन की शुरुआत करने से पूरे दिन सकारात्मकता, स्पष्टता और आध्यात्मिक जुड़ाव की भावना आती है।
  2. शाम: शाम का समय भी शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने के लिए एक शुभ समय माना जाता है। शाम को इस स्तोत्र का जाप करने से मन को शांति मिलती हे और रात की आरामदायक नींद मिलती हे।
  3. महाशिवरात्रि: भगवान शिव की महान रात्रि, महाशिवरात्रि, भगवान शिव को समर्पित सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है।
  4. श्रावण: इस माह को आध्यात्मिक साधना के लिए बहुत शुभ समय माना जाता है। शिव तांडव स्तोत्र का जाप भगवान शिव से जुड़ने और उनके आशीर्वाद का अनुभव करने का एक शक्तिशाली तरीका है।

मंत्र का जाप स्वच्छ एवं शांतिपूर्ण वातावरण में करें। इससे आपको मंत्र पर ध्यान केंद्रित करने और अपने अभ्यास के लिए एक पवित्र स्थान बनाने में मदद मिलेगी।

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FAQ For Shiv Tandav Strotam

शिव तांडव किसने लिखा था?

शिव तांडव स्त्रोतम रावण द्वारा रचित है | जिसे शिव का बहुत बड़ा भक्त माना जाता है

शिवतांडव स्तोत्र में कितने श्लोक हैं ?

शिव तांडव में कुल 17 श्लोक होते हैं जो रावण के द्वारा रचित किए गए हैं।

शिव तांडव स्तोत्र किस ग्रंथ में है ?

भगवान शिव को प्रसन्न करने केलिए ल॑काधिपति रावण के द्वारा किया गया शिव तांडव स्तोत्र आदि कवि वाल्मीकि द्वारा विरचित रामायण ग्रंथ में है

रावण ने शिव तांडव क्यों लिखा था?

रावण जब कैलाश को लेकर चलने लगे तब भगवान् शिव ने अंगूठे से कैलाश को दबा दिया था जिससे कैलाश वहीं रह गया और रावण दब गया | तब लंकाधिपति रावण ने भगवान् शिव को प्रसन्न करने के लिए जो स्तुति की वह शिव तांडव स्तोत्र कहलाया

शिव तांडव स्तोत्र के लाभ ?

शिव तांडव का पाठ करने से व्यक्ति का चेहरा तेजमय होता है आत्मबल मजबूत होता है


निष्कर्ष 

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हर हर महादेव

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